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                     मानवता (Humanity)
                       - आचार्य श्री विद्यासागर महाराज 
 
   

  Acharya Vidyasagar maharaj

  ज्ञान का अर्थ है देखने की आँखे | ऐसी आँखे उनके पास होती है जिनमें करूणा का जल छलकें | धर्म ; यही है कि दीनदुखी जीवों को देखकर आँखो में करुणा का जल छलक आये, अन्यथा आँखे छिद्र ; के समान हैं | जिस ज्ञान के माध्यम से प्राणीमात्र के प्रति संवेदना जागृत नहीं होती, उस ज्ञान का कोई मूल्य नहीं और वे आँखे किसी काम की नही, जिनमें देखने-जानने के बाद भी संवेदना की दो तीन बूँदे नहीं छलकतीं |
  आजकल  इस  भारत  में  सैकड़ों   बूचड़खाने   का   निर्माण   हो रहा है |   पशुपक्षी   मारे जा रहे हैं | आप सुन रहे हैं, देख रहे हैं फिर भी उन राम-रहीम और भगवान महावीर के समय   में   जिस  भारत भूमि   पर   दया बरसती थी, सभी प्राणियों के लिए अभय था, उसी भारतभूमि पर आज अहिंसा खोजे-खोजे नहीं मिलती |   आज   बड़ी-बड़ी    मशीनों   के   सामने रखकर एक-एक दिन में दस-दस लाख निरपराध पशु काटे    जा रहे हैं |   सर्वत्र  बड़े-बड़े नगरों में हिंसा का ताण्डव नृत्य दिखाई दे रहा  हैं | आपको   कुछ करने की,   यहाँ   तक कि   यह   सब देखने तक की फुरसत नहीं हैं | क्या   आज   इस  दुनिया   में   ऐसा   कोई   दयालु   वैज्ञानिक   नहीं   है,   जो   जाकर   के   इन निरपराध पशुओं की करूण   पुकार को सुन सके ? उनके पीड़ित जीवन को समझकर उनकी   आत्मा   की   आवाज पहचानकर हिंसा के बढ़ते हुए आधुनिक साधनों पर रोक लगा सकें ? 
   आज पशुओं की हत्या करके, उनका चमड़ा, मांस आदि सब कुछ अलग करके डिब्बों  में बन्द करके निर्यात किया जाता है | सरकार सहयोग करती है और आप भी पैसों के  लोभ   में   ऐसे   अशोभनीय   कार्यों   में   सहयोगी   बनते   हैं | आप केवल नोट ही देख रहे हैं फारेन करेंसी | लेकिन आगे जाकर जब इसका फल मिलेगा तब मालूम पड़ेगा| इस दुष्कार्य में जो भी व्यक्ति समर्थक है,   यथायोग्य   हिस्सा   भोगना   पड़ेगा |   समय किसी को माफ नहीं करता | 
   जिस    भारतभूमि   पर   धर्मायतनों   का   निर्माण   होता   था,   उसी   भारतभूमि   पर   आज धड़ाधड़ सैकड़ो हिंसायतनों का निर्माण हो रहा है | इसमें राष्ट्र के साथ-साथ व्यक्ति का दोष है क्योंकि देश में प्रजातंत्रात्मक शासन है | प्रजा ही राजा है | आपने ही चुनाव के माध्यम  से   वोट   देकर   शासक   नियुक्त    किया   है |    यदि   आपके   भीतर   निरन्तर  होने वाली उस   हिंसा   को   देखकर करुणा जागृत हो जाए, तो शासक कुछ नहीं कर सकते | आपको जागृति लानी चाहिए |  
    - नवम्बर 2006 जिनभाषित से साभार

  

                                                                                            

                                                                        (Hindi Version)

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