|
ज्ञान का अर्थ है
देखने की आँखे | ऐसी आँखे उनके पास होती है जिनमें
करूणा का जल छलकें | धर्म ; यही है कि दीनदुखी जीवों को
देखकर आँखो में करुणा का जल छलक आये,
अन्यथा आँखे छिद्र ; के समान हैं | जिस ज्ञान के माध्यम से
प्राणीमात्र के प्रति संवेदना जागृत नहीं होती, उस
ज्ञान का कोई मूल्य नहीं और
वे आँखे किसी काम की नही,
जिनमें देखने-जानने के बाद
भी संवेदना की दो तीन बूँदे
नहीं छलकतीं |
आजकल इस भारत में
सैकड़ों बूचड़खाने
का निर्माण हो
रहा है | पशुपक्षी
मारे जा रहे हैं | आप सुन रहे
हैं, देख रहे हैं फिर भी उन
राम-रहीम और भगवान महावीर
के समय में जिस
भारत भूमि पर दया
बरसती थी, सभी प्राणियों के
लिए अभय था, उसी भारतभूमि
पर आज अहिंसा खोजे-खोजे
नहीं मिलती | आज
बड़ी-बड़ी मशीनों
के सामने रखकर एक-एक
दिन में दस-दस लाख निरपराध
पशु काटे जा रहे हैं
| सर्वत्र बड़े-बड़े
नगरों में हिंसा का ताण्डव
नृत्य दिखाई दे रहा हैं |
आपको कुछ करने की,
यहाँ तक कि यह
सब देखने तक की फुरसत नहीं
हैं | क्या आज इस
दुनिया में ऐसा
कोई दयालु
वैज्ञानिक नहीं
है, जो जाकर
के इन निरपराध पशुओं
की करूण पुकार को सुन
सके ? उनके पीड़ित जीवन को
समझकर उनकी आत्मा
की आवाज पहचानकर
हिंसा के बढ़ते हुए आधुनिक
साधनों पर रोक लगा सकें ?
आज पशुओं की हत्या
करके, उनका चमड़ा, मांस आदि
सब कुछ अलग करके डिब्बों
में बन्द करके निर्यात
किया जाता है | सरकार सहयोग
करती है और आप भी पैसों के
लोभ में ऐसे
अशोभनीय कार्यों
में सहयोगी बनते
हैं | आप केवल नोट ही देख रहे
हैं फारेन करेंसी | लेकिन
आगे जाकर जब इसका फल मिलेगा
तब मालूम पड़ेगा| इस दुष्कार्य में जो भी
व्यक्ति समर्थक है,
यथायोग्य हिस्सा
भोगना पड़ेगा |
समय किसी को माफ नहीं करता |
जिस भारतभूमि
पर धर्मायतनों का
निर्माण होता था,
उसी भारतभूमि पर
आज धड़ाधड़ सैकड़ो हिंसायतनों का निर्माण हो
रहा है | इसमें राष्ट्र के साथ-साथ व्यक्ति का
दोष है क्योंकि देश में प्रजातंत्रात्मक शासन है |
प्रजा ही राजा है | आपने ही
चुनाव के माध्यम से
वोट देकर शासक
नियुक्त किया
है | यदि आपके
भीतर निरन्तर होने वाली
उस हिंसा को
देखकर करुणा जागृत हो जाए,
तो शासक कुछ नहीं कर सकते |
आपको जागृति लानी चाहिए |
- नवम्बर 2006
जिनभाषित से साभार
|