logo jaindharmonline.com

Home>   Jain News>>

अपनी बात 

 अपनी बात...!

बड़ा काम कैसे होता, पूछा मेरे मन से,
बड़ा लक्ष्य हो, बड़ी तपस्या, बड़ा ह्रदय मृदुवाणी |
किन्तु अहम छोटा हो जिसमें, सहज मिले सहयोगी,
दोष हमारा, श्रेय प्रभु का, हो प्रवृत्ति कल्याणी ||

लाडनूं के दिगम्बर जैन समुदाय के व्यक्ति जहां भी गये है उन्होंने अपनी कार्य क्षमता व कौशल से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है | लाडनूं एक ऐतिहासिक नगरी है तथा दिगम्बर जैन धर्मावलंबी इसके प्रारम्भिक वाशिन्दे माने जाते है | इस शहर को जैन सम्प्रदाय की बड़ी बहुमूल्य देन है | यहां आज तक कुल इकत्तीस दिगम्बर जैन पंचकल्याणक प्रतिष्ठायें हो चुकी है जो महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल श्री सम्मेद-शिखरजी के बाद सर्वाधिक संख्या है | इस दृष्टि से यह शहर दिगम्बर जैन के बड़े तीर्थों में शुमार हो गया है | इसे अतिशय क्षेत्र होने का भी सम्मान मिल चुका है |

कोई भी नगर केवल गढो, हवेलियों, जाली-झरोखों, मन्दिरों से नही बनता इसके निर्माण मे जीवट वाले कृति पुरुषों का योगदान रहता है | लाडनूं में कभी 350-400 जैन परिवार निवास करते थे पर कालान्तर में व्यवसायिक कारणों से देश के अन्य भागों में प्रवास करने लगे | अभी लाडनूं में इन जैन परिवारों की संख्या करीब 150 तक सिमट गई है |

          

 

अक्टूबर 2014 में लाडनूं अवस्थित भूगर्भ से प्रकट हुये प्राचीन जैन मंदिर का सहस्त्राब्दी वर्ष मनाने का जब निर्णय लिया गया तो मेरे मन में उत्सुकता जगी कि, क्यों न इस पुनीत अवसर पर लाडनूं निवासियों व प्रवासियों की एक निर्देशिका प्रकाशित की जाय | यह एक दुरुह कार्य था | दूर-दराज बसे प्रवासी दिगम्बर जैन परिवारों से सम्पर्क कर परिवार सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करना कठिन कार्य था पर प्रभु की कृपा तथा बुजुर्गो का आशीर्वाद रहा कि सम्पर्क कार्य आगे बढ़ता रहा | करीब 950 दिगम्बर जैन परिवारों की जानकारी उपलब्ध हो गई जिसे इस निर्देशिका में समाहित किया गया है | मुझे सम्पर्क अवधि के समय सुखद् आश्चर्य भी हुआ कि लोग अपने मूल क्षेत्र से जुड़ने के लिए कितने उत्सुक है | मेरे निर्देशिका सम्पादन के कार्य में अपने स्वनामधन्य पितामह गणेशमल जी पाटनी, स्मृतिशेष पूज्य पिताश्री हुकमचन्द पाटनी का आशीर्वाद मेरा सम्बल रहा है | वात्सल्य मुर्ति माता श्रीमती छगनी देवी मेरी प्रेरणा स्त्रोत रही है |

मै कृतज्ञता प्रकट करता हूं मेरे अग्रज धनकुमारजी, विजयकुमारजी, महेन्द्रकुमारजी, शांतिलालजी जिन्होंने मेरा इस कार्य हेतु उत्साह वर्द्धन किया | अनुज दिलिप कुमार का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा | श्री वीरेन्द्र पाण्डया् को उनके अथक श्रम व सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद देना चाहुंगा जिन्होनें कई दुर दराज बसे परिवारों के पते संग्रह करने में मेरी सहायता की |

निर्देशिका संयोजन / सम्पादन को सम्भव बनाने में निम्न महानुभावों का भी विशेष सहयोग रहा श्री सुमन सेठी, गौहाटी, श्री संजय बड़ज्याता, (ममलू), कोलकाता, श्री राकेश कुमार पाटनी, डेह, श्री बंशीधर जी शर्मा, कोलकाता, हो सकता है कुछ नाम मेरी स्मृति से छुट गये हो उनके प्रति भी मेरा आभार |

मेरा विश्वास है कि यह निर्देशिका लाडनूं के दिगम्बर जैन परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी | सामग्री एकत्रित करने में यथासम्भव प्रयास किया गया है, फिर भी सम्भव है कुछ नाम छुट गये हो उनका आगामी प्रकाशन में सुधार किया जा सकेगा | इसके अतिरिक्त प्रकाशन में सावधानी के बावजूद कुछ त्रुटिया रह जाना स्वाभाविक है इसके लिये क्षमा प्रार्थी हूं | इस निर्देशिका में संकलित सामग्री करीब डेढ़ वर्ष की अवधि में संग्रहीत की गई है | हो सकता है कुछ तथ्यों में समयानुसार परिवर्तन हुआ जिसे इसमें समाहित नही किया जा सका, सुह्रदय पाठक इसे उसी दृष्टि से देखें | आपके सकरात्मक सुझाव हमारा मार्ग दर्शन करते रहेगें |

    

 

  यह निर्देशिका ओन लाईन भी उपलब्ध है -
website: www.jaindharmonline.com
इसमें नये परिचय व प्रकाशित परिचय में त्रुटि सुधार हेतु नया प्रपत्र प्रेषित कर सकते है -

सम्पर्क - Bimal Kumar Patni .
4E, B.B.D Bag, Stephen House, 2nd Fl. Kolkata - 
700001, Mo. 9831010725, 9903473526, email - bimalpatni1@yahoo.co.in, jaindharmol@yahoo.co.in 

 

                                                                                                                                                                       

   

                        copyright ã 2004, jaindharmonline.com All Rights Reserved.